राजीव गांधी: वह युवा प्रधानमंत्री जिसने भारत को भविष्य की राह दिखाई
राजीव गांधी: वह युवा प्रधानमंत्री जिसने भारत को भविष्य की राह दिखाई इकरार अली
संवाददाता मसर्रत अली
बदायूं राजीव गांधी विचार विभाग के कैंप कार्यालय आरिफपुर नवादा बदायूं में भारत रत्न देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी की जयंती पर संगठन के कार्य कर्ताओं ने उनके चित्र पर फूल अर्पित कर उनकी जयंती मनाई
इस अवसर पर राजीव गांधी विचार विभाग के जिला अध्यक्ष इकरार अली ने कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति के साथ भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करने वाले दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया जाता है। लेकिन उनका योगदान केवल तकनीक तक सीमित नहीं था। युवा मताधिकार, पंचायती राज, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, शांति और प्रशासनिक आधुनिकीकरण तक उनके कार्यकाल में अनेक दूरगामी पहल हुईं।
राजीव गांधी सरकार ने मतदान की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की। 61वें संविधान संशोधन के जरिए करोड़ों युवाओं को लोकतंत्र में सीधे भागीदारी का अधिकार मिला। यह युवाओं की शक्ति और समझ पर उनके भरोसे का ऐतिहासिक फैसला था।
राजीव गांधी का मानना था कि लोकतंत्र की ताकत दिल्ली और राज्यों की राजधानियों से निकलकर गांवों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने की महत्वपूर्ण पहल की। आगे चलकर 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में विकेंद्रीकरण की
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के माध्यम से शिक्षा में गुणवत्ता, विज्ञान और आधुनिकता पर जोर दिया गया। इसी दौर में जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुआत हुई, जिससे ग्रामीण प्रतिभाशाली बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के नए अवसर खुले।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं, शिक्षण सामग्री और शिक्षकों की उपलब्धता सुधारने के लिए ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड शुरू किया गया। वहीं 1985 में IGNOU की स्थापना ने दूरस्थ शिक्षा के जरिए लाखों लोगों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे खोले
जिस दौर में कंप्यूटर को लेकर आशंकाएं थीं, राजीव गांधी ने भारत को तकनीक से दूर रखने के बजाय उसके लिए तैयार किया। रेलवे आरक्षण और सरकारी व्यवस्थाओं में कंप्यूटरीकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर क्षेत्र को प्रोत्साहन तथा प्रशासन में नई तकनीक के प्रयोग ने आधुनिक भारत की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजीव गांधी ने तकनीक को केवल कंप्यूटर तक सीमित नहीं रखा। पेयजल, टीकाकरण, साक्षरता, तिलहन उत्पादन और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी मिशन के माध्यम से विज्ञान को आम लोगों की समस्याओं के समाधान से जोड़ने की कोशिश की गई
राजीव गांधी ने आंतरिक संघर्षों के समाधान के लिए संवाद को महत्व दिया। 1985 का राजीव लोंगोवाल समझौता, 1985 का असम समझौता और 1986 का मिजोरम शांति समझौता इसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। मिजोरम समझौते ने लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने में विशेष भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 लागू हुआ, जिसने प्रदूषण से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत किया। इसी दौर में गंगा एक्शन प्लान शुरू हुआ, जिसने गंगा की सफाई को एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम का स्वरूप दिया।
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