हेपेटाइटिस C एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी, समय पर जांच और इलाज से संभव है पूर्ण स्वस्थ जीवन , डॉ. अमोल गुप्ता

हेपेटाइटिस C एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी, समय पर जांच और इलाज से संभव है पूर्ण स्वस्थ जीवन , डॉ. अमोल गुप्ता


संवाददाता मसर्रत अली 
सहसवान। हेपेटाइटिस C एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से यकृत (लीवर) को प्रभावित करता है। यदि समय पर इसकी पहचान और उपचार न कराया जाए तो यह धीरे-धीरे लीवर सिरोसिस, लीवर फेल्योर तथा लीवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यह जानकारी डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल,सहसवान के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं क्रॉनिक डिजीज़ विशेषज्ञ डॉ. अमोल गुप्ता ने जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत दी।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस C वायरस मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। असुरक्षित रक्त चढ़ाना, संक्रमित सुई या सिरिंज का उपयोग, बिना उचित संक्रमण नियंत्रण के टैटू या पियर्सिंग कराना तथा कुछ परिस्थितियों में संक्रमित माता से शिशु में संक्रमण इसका कारण बन सकते हैं। सामान्य साथ बैठने,हाथ मिलाने,भोजन साझा करने,गले मिलने या मच्छर के काटने से यह संक्रमण नहीं फैलता।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी के प्रारंभिक चरण में कई रोगियों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। कुछ लोगों में अत्यधिक थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट के दाहिने ऊपरी भाग में दर्द, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), गहरे रंग का मूत्र तथा लंबे समय तक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए जोखिम वाले व्यक्तियों को समय-समय पर जांच अवश्य करानी चाहिए।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि आज हेपेटाइटिस C का प्रभावी और सुरक्षित उपचार उपलब्ध है। आधुनिक एंटीवायरल दवाओं (Direct-Acting Antivirals) से अधिकांश रोगियों में संक्रमण पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को स्वयं दवा लेने या अप्रमाणित उपचारों पर निर्भर रहने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट अथवा हेपेटोलॉजिस्ट की सलाह लेकर मानक उपचार अवश्य कराना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि *होम्योपैथी, योग एवं आयुर्वेद द्वारा अनेक बार एलोपैथी द्वारा असाध्य हेपेटाइटिस C बीमारी को ठीक किया जाता है।* योग्य चिकित्सकीय परामर्श में होम्योपैथी अधिकांश रोगियों में थकान, पाचन संबंधी शिकायतों तथा समग्र स्वास्थ्य एवं जीवन-गुणवत्ता में सुधार के लिए सहायक (Complementary Care) के रूप में उपयोग की जाती रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मानक एंटीवायरल उपचार को छोड़ना या विलंबित करना उचित नहीं है।

डॉ. गुप्ता ने हेपेटाइटिस C से बचाव के लिए निम्न सावधानियां अपनाने की सलाह दी—

* केवल जांचे हुए एवं सुरक्षित रक्त का ही उपयोग करें।
* इंजेक्शन, सुई और सिरिंज कभी साझा न करें।
* टैटू या पियर्सिंग केवल स्वच्छ एवं प्रमाणित केंद्रों पर ही कराएं।
* रेजर, नेल कटर और टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत वस्तुएं साझा न करें।
* स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन करें।
* जोखिम वाले व्यक्तियों को समय-समय पर हेपेटाइटिस C की जांच अवश्य करानी चाहिए।

अंत में डॉ. अमोल गुप्ता ने कहा कि जागरूकता, समय पर जांच और वैज्ञानिक उपचार ही हेपेटाइटिस C से बचाव एवं नियंत्रण की सबसे प्रभावी कुंजी है।किसी भी प्रकार के लक्षण या जोखिम की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच एवं उपचार प्रारंभ करना चाहिए।

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